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पर्यटन स्थल

अस्मिता की प्रतीक विश्व की सबसे बड़ी पक्षी प्रतिमा

Jatayu Earth's Center


पर्यटन का स्वरूप बदल रहा है और इसको विकसित करने के पीछे की सोच और तौर-तरीके भी। इसी का एक खूबसूरत उदाहरण इन दिनों गॉड्स ओन कंट्री केरल में जटायु अर्थ सेंटर के रूप में देखने को मिल रहा है। केरल के बेहद खूबसूरत कोल्लम की वादियों में स्थित इस जगह के माध्यम से पर्यटकों को कला, इतिहास, संस्कृति, तकनीक, प्राकृतिक संपन्नता और रोमांच का अनुभव कराने की कोशिश की गई है।आपको बता दूं कि जटायु अर्थ सेंटर (Jatayu Earth’s Center) किसी पक्षी की दुनिया में सबसे बड़ी प्रतिकृति है जो अपने आपमें ही एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है लेकिन इससे भी बड़ी और खूबसूरत बात इसके विकसित करने के पीछे की सोच और विचार है।

हमारे पौराणिक धर्मग्रंथों और शास्त्रों में प्रसिद्ध रामायण के चर्चित जटायु पक्षी की अवधारणा पर इस सेंटर का निर्माण किया गया है जिसने माता सीता को बचाने के लिए अपने पंख को कटवा लिया था। इसीलिए दुनिया भर में जटायु अर्थ सेंटर (Jatayu Earth’s Center) को स्त्री अस्मिता के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। इस जगह का चुनाव भी उसी पौराणिक विचार और अवधारणा को मजबूत करता है। शास्त्रों के अनुसार यह वही जगह है जहां पर जटायु मारा गया था।

इस जगह के साथ कई मिथ जुड़े हुए हैं, इसलिए इसके निर्माणकर्ताओं ने इसका चुनाव किया। जनश्रुतियों के अनुसार रामायण में जिस जगह पर लंकापति रावण ने सीता-हरण के समय पक्षीराज जटायु के पंख काटकर गिराए थे, वह जगह आज ‘जटायुपर’ कहलाती है।

जटायु अर्थ सेंटर (Jatayu Earth’s Center) में एक संग्रहालय और 3डी थियेटर भी है, जहां पर दर्शकों को जटायु की कहानी पर आधारित एक लघु फ़िल्म दिखाई जाती है। दुनिया के इस सबसे बड़े पक्षी जटायु की प्रतिकृति 200 फीट लंबी, 150 फीट चौड़ी, 65 फीट ऊंची है और यह चट्टान के ऊपर दाहिने तरफ समुद्र तल से एक हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

रावण और सीता हरण का प्रसंग रामायण में काफी प्रसिद्ध है। इस सेंटर को बनाने के पीछे भी इसी से जुड़े एक पौराणिक कथा को लिया गया है जिसका जिक्र जरुरी है। अपहरण करके रावण जब सीता को लंका ले जा रहा था तो उन्होंने सभी जीवों से और प्रकृति से मदद की गुहार लगायी थी। यह गुहार सुनने के बाद जटायु ने रावण को चेतावनी दी की सीता को छोड़ दे अन्यथा युद्ध के लिये तैयार रहे, रावण ने उन्हें अनदेखा कर दिया।

रावण पर जटायु पूरी शक्ति से टूट पड़ा और भयंकर लड़ाई लड़ी। रावण ने उसका एक पंख काट दिया और धरती पर गिर पड़ा। राम जब सीता को ढूंढते हुए पहुंचे तो जटायु ने सारी बात बताई। राम ने उससे कहा कि जब तुम्हें पता था कि तुम रावण से युद्ध नहीं जीत सकते तो तुम उससे लड़े क्यों ? जटायु ने कहा ‘मुझे पता था कि मैं रावण से युद्ध में नहीं जीत सकता लेकिन यदि मैंने उस वक्त रावण से युद्ध नहीं किया होता तो भारतवर्ष की अनेक पीढ़ियां मुझे कायर कहती।

एक नारी का अपहरण अपनी आंखों के सामने नहीं देखा गया। कायरों की भांति यह देखने से अच्छा तो मौत ही है। मैं अपने सर पर कायरता का कलंक लेकर जीना नहीं चाहता था इसलिए मैंने रावण से युद्ध किया। उसी जटायु की पवित्र स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए ‘जटायु नेचर पार्क’ ठीक उसी जगह पर बनाया गया है जहां जटायु रावण से लड़ते हुए गिरा था। जिस तरह से मां सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करते समय जटायु का एक पंख कट गया था उसी तरह इस प्रतिमा का भी एक पंख नहीं बनाया गया है।

जटायु अर्थ सेंटर (Jatayu Earth’s Center) की खूबसूरती आसपास के प्राकृतिक वातावरण और नज़ारों की वजह से और बढ़ जाती है। चारों तरफ हरा भरा वातावरण और खूबसूरत पहाड़ियां मन को मोहती जान पड़ती हैं। जटायु प्रतिमा के अतिरिक्त यहां राम मंदिर, आयुर्वेद केव रिजॉर्ट, एक डिजिटल म्युज़ियम, आर्चरी, लेज़र टैग, राइफल शूटिंग रेंज, रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग के अलावा और भी बहुत कुछ है। गेम ज़ोन है और साथ ही केबल कार है। यह केबल कार पूरे पार्क और आसपास का विहंगम दृश्य दिखाएगी।

स्त्री स्मिता के प्रतीक के रूप में दर्शाये गए इस सेंटर को बनाने में इंजीनियरों के अलावा महिलाओं ने भी मदद की है। महिलाओं का यहां के काम में भी काफी महत्‍वूपर्ण योगदान है। यही वजह है कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों में अधिकतर संख्‍या महिलाओं की ही रखी गई है और पार्क को महिला सम्‍मान और महिला सुरक्षा को समर्पित किया गया है।

इस जगह पर पहुंचने के लिए आप सड़क, रेल या फिर हवाई मार्ग का चुनाव कर सकते हैं। नज़दीकी बस स्टैंड चदयामंगलम है। इसलिये आपको जटायु नेचर पार्क पहुंचने के लिये पहले चदयामंगलम पहुंचना होगा। वर्कला और कोल्लम से भी इस जगह पर जाया जा सकता है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन पुनालुर 25 किमी की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा आप परवूर, कोल्लम कोटरकारा वर्कला रेलवे स्टेशन से भी इस जगह पर पहुंच सकते हैं।

नज़दीकी हवाई अड्डा तिरुअनंतपुरम में 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

[नोट: इस ले लेख में लगा सभी पिक्चर कला, साहित्य और सामाजिक रूप से सक्रिय रहने वाली Kiran Watti जी ने लिया है। ]

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travel writer sanjaya shepherd लेखक परिचय

खानाबदोश जीवन जीने वाला एक घुमक्कड़ और लेखक जो मुश्किल हालातों में काम करने वाले दुनिया के श्रेष्ठ दस ट्रैवल ब्लॉगर में शामिल है। सच कहूं तो लिखने और घूमने के अलावा और कुछ आता ही नहीं। इसलिए, वर्षों से घूमने और लिखने के अलावा कुछ किया ही नहीं। बस घुम रहा हूं।